पालमपुर के बनूरी(भरमात )गांव की विद्या देवी ने मनरेगा में मजदूरी करके कोरोना राहत कोष में दिया योगदान | महिला के जज्बे को सलाम

अपने घर का चूल्हा बेशक कड़क धूप में निकलने वाले पसीने से ही चलता है लेकिन कोरोना महामारी के चलते कोई घर ऐसा न हो जहां मदद न पहुंच रही है , कोई बीमार ऐसा नहीं जिसे अस्पताल में सुविधा नहीं मिल रही । ऐसा ही जज्बा रखने वाली मनरेगा में मजदूरी करने वाली महिला पालमपुर एसडीएम के पास पांच हजार रुपये का कोरोना राहत कोष में योगदान देने आयी । महिला का जजबा यह साबित क कि करता है कि गरीबी तो हर किसी को होती है लेकिन दिल की अमीरी हर किसी के पास होना बहुत मुश्किल है ।

देश में फैले कोरोना महामारी संकट से निपटने के लिए हर कोई अपना योगदान दे रहा है। विद्या जी कहती हैं टीवी पर खबरें सुनते हुए कई बार मन में विचार आया कि मैं भी कुछ मदद करूं लेकिन मेरे पास इतनी राशि न होने के कारण शर्म आ रही थी । लेकिन पिछले दिनों टीवी पर ही कहा कि कोई सौ रुपये भी मदद कर सकता है तो मेरा हौसला बढ़ा। विद्या देवी रविवार को भेंट करने के लिए यहां आईं। विद्या देवी का कहना कि जब डॉक्टरों से लेकर पुलिस वाले जान जोखिम में डालकर सेवा कर रहे हैं तो हम लोगों को भी कुछ करना चाहिए। वह कहती हैं कि घर की जरूरतें तो कभी पूरा नहीं हो सकती । मेरा भी परिवार है, लेकिन अगर हम जिंदा रहेंगे तो जरूरतें भी पूरी हो जाएंगी। इसलिए ही यह मदद करने का विचार मन में आया।पालमपुर के भरमात गांव की विद्या देवी जब SDMऑफिस में मदद की राशि देने पहुंची तो एसडीएम धर्मेश भी हैरान हो गए कि एक दिहाड़ीदार महिला के लिए सेवा भाव कितना अहम है। 58 साल की उम्र में मनरेगा में दिहाड़ी लगाकर कमाए पांच हजार रुपये का योगदान महिला ने कोरोना महामारी के राहतकोष में दिया।रविवार सुबह कई लोग एसडीएम पालमपुर से मिलने के लिए आये थे। अधिकतर लोग अपनी समस्या के संबंध में ही SDM से मुलाकात करना चाह रहे थे।

एसडीएम ने यहां आए लोगों से बारी-बारी अंदर आने के लिए कहा। जब विद्या देवी एसडीएम के पास पहुंचीं तो उन्होंने कहा कि बताएं आपको क्या समस्या है। हाथ में पसीने से चिपके नोट विद्या देवी कहने लगीं कि मुझे कुछ मदद केलिए राशि देनी है। एसडीएम ने कहा कि कॅश तो नहीं लेते हैं इसलिए आप चेक के माध्यम से दान दे सकती हैं। विद्या देवी कहने लगीं, ‘साहब , मैं गरीब महिला कहां चेक बनवाने के लिए घूमुंगी


SDM ने पूछा आप क्या करती हैं? इस पर महिला ने बताया कि वह मनरेगा में दिहाड़ी लगाती हैं और उसके पास सिर्फ पांच हजार रुपये ही हैं, जो मदद के तौर पर कोरोना राहत कोष में देना चाहती हूं। महिला की भावना देखकर एसडीएम भी भावुक हो गए। बोले मैं आपकी भावना का सम्मान करता हूं लेकिन आप इसमें से कुछ पैसे रख लो आपको नहीं तो जरूरत होगी । इस पर विद्या देवी का कहना था कि साहब जरूरतें तो कभी पूरी नहीं होती हैं। इसलिए उसकी तरफ से छोटी सी भेंट स्वीकर करे । महिला के इतना कहने पर उन्होंने पांच हजार रुपये स्वीकार कर लिए ।

पालमपुर के बनूरी क्षेत्र की भरमात पंचायत की निवासी विद्या देवी के पति सूरज सिंह ने भी उसे ऐसा करने से मना नहीं किया । घर की माली हालत कैसी भी रही हो लेकिन दूसरों की सेवा का जज्बा इस महिला का हौसला हर किसी के लिए नजीर है। दो बेटों की मां ऐसी स्थिति में मदद कर रही है जब दोनों बेटे बाहर फंसे हैं। एक बेटा किसी की गाड़ी चलाता है जबकि दूसरा निजी कंपनी में मजदूरी इत्यादि करता है। दोनों बेटे इस समय घर पर नहीं हैं।

विद्या कहती हैं कि जब डॉक्टर से लेकर पुलिस वाले जान जोखिम में डालकर सेवा कर रहे हैं तो हम भी कुछ करना चाहिए। वह कहती हैं कि घर की जरूरतें तो कभी पूरा नहीं होती हैं। मेरा भी परिवार है, लेकिन अगर जिंदा रहेंगे तो जरूरतें भी पूरी हो जाएंगी। इसलिए ही यह मदद करने का विचार मन में आया|

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