डॉ। राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कोरोना वायरस को लेकर प्रबंधन गंभीर । संबंधित मरीजों की देखभाल के लिए किया विशेष वार्ड स्थापित

कांगड़ा,  डॉ। राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल में खांसी के मरीजों के जल्दी जांच और  उपचार के लिए प्राथमिकता दी जा रही है।  खांसी वाले मरीजों के लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से विशेष पास दिया जाएगा। जिसमें पीडि़त मरीजों के नमूनों की जांच में और उपचार में डाक्टर व लैब स्टाफ व  सहयोगी स्टाफ इन्हें प्राथमिकता देगा।

अगर डॉक्टर को किसी तरह का कोई कोरोना वायरस को लेकर संदेह होता  है तो पीडि़त मरीज को आइसोलेशन वार्ड में तुरंत भर्ती किया जाएगा।

दुनिया भर में कोरोना वायरस  चल रहा है। इसी के चलते टांडा अस्पताल प्रबंधन ने एक विशेष वार्ड संबंधित मरीजों की देखभाल के लिए तय किया है, जिसमें आठ बिस्तरों की व्यवस्था की गई है। चीन के कोरोना वायरस के बारे में मरीज व तीमारदारों को जागरूक करने के लिए अस्पताल प्रशासन पचास से अधिक बोर्ड अलग स्थानों पर स्थापित कर रहा है ताकि कोरोना वायरस से बचा जा सके। मैक्लोडगंज में अक्सर अलग अलग  राज्य व विदेशी मूल के नागरिकों की आवाजाही रहती है, इसकों लेकर अस्पताल प्रबंधन सतर्क है  । इसके अलावा अस्पताल  स्टाफ को कोरोना के बारे में जरूरी दिशा निर्देश जारी किया गया है।

दिल्ली में कोरोनावायरस के तीन संदिग्ध मामले सामने आए

मरीज हाल में चीन से आये थे और नई दिल्ली के डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती हुए थे,

जानकारी के अनुसार तीन रोगी हैं। कोरोना वायरस की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन लक्षण दिख रहे हैं,

भारत में अब तक कोई सकारात्मक मामलों का पता नहीं लग पाया है,

कोरोना वायरस कैसे फैलता है ?

जब एक संक्रमित व्यक्ति सांस लेता है, खांसी या छींकता है। तो ये वायरस दूषित जगहों जैसे दरवाज़े के हैंडल या रेलिंग के माध्यम से भी फैल सकता है।

corona-virus

आम मानव कोरोनविर्यूज़, जिसमें 229E, NL63, OC43 और HKU1 शामिल हैं, आमतौर पर श्वसन तंत्र की बीमारियों का कारण होते हैं, जैसे कि सामान्य सर्दी। अधिकांश लोग अपने जीवन में इन वायरस से संक्रमित होते हैं। ये बीमारी आमतौर पर थोड़े समय के लिए ही रहती है। लक्षण हो सकते हैं

बहती नाक
सरदर्द
खांसी
गले में खराश
बुखार
अस्वस्थ होने का एक सामान्य एहसास

मानव कोरोना वायरस कभी-कभी निमोनिया या ब्रोंकाइटिस जैसी कम श्वसन तंत्र की बीमारियों का कारण बन सकता है। यह कार्डियोपल्मोनरी रोग वाले लोगों में अधिक आम है, कमजोर इम्युनिटी प्रणाली वाले शिशुओं, और पुराने वयस्कों में ये आसानी से फ़ैल सकता है ।

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