पालमुपर में 2300 कनाल चाय बागान की जमीन को हथियाने की साजिश नाकाम

पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार के सपनो का Project सौरभ वन विहार के पास एक इलाके में मिलीभगत से Tea garden के अधीन आने वाली 2300 कनाल जमीन को 3rd Pary यानी तीसरे व्यक्ति के नाम करवाने की साजिश officers ने नाकाम कर दी है। जमीन अरबों रुपये की है। Land sealing Act औरgovt law को किनारे कर केवल वसीयत के सहारे जमीन को हथियाने की कोशिश हो रही थी। High Profile दबाव के बीच जमीन को हथियाने के लिए बड़ी चालाकी से trap बिछाया गया था। 

पालमपुर तहसीलदार court ने जमीन की वसीयत का इंतकाल यानी नाम चढ़ाने की अर्जी अपने court में cancel कर दी है। SDM Court पालमपुर ने भी याचिकाकर्ता की जमीन का इंतकाल करने की अपील खारिज कर दी है। सूत्र बताते हैं कि मामला काफी high profile है। वसीयत नाम करवाने के लिए अंदरखाते बड़े स्तर पर साजिश हो रही थी।


पालमपुर के एक निसंतान व्यक्ति ने सौरभ वन विहार के पास अपनी चाय बागान के अधीन आने वाली करीब 2300 कनाल भूमि की वसीयत परिवार के नाम न कर पालमपुर के ही किसी तीसरे व्यक्ति के नाम वर्ष 2003 में कर दी थी। चाय बागान के इस संरक्षक की वर्ष 2018 में मौत हो गई। इसकी पत्नी की भी मौत हो गई थी। चाय बागान के संरक्षक ने जिस तीसरे व्यक्ति के नाम चाय बागान की जमीन की वसीयत की थी, वह जमीन को अपने नाम करवाने के लिए तहसीलदार पालमपुर के कोर्ट में पहुंच गया। अधिकारी ने जांच में पाया कि मामला गड़बड़ है। 
यह कहता है sealing act
sealing on Land holding संशोधित एक्ट 1999 की धारा 10 के अनुसार tea garden के अधीन आने वाली जमीन की बिक्री दान, लीज, गिरवी रखने की अनुमति नहीं है। इस परिस्थिति में सरकार ही विशेष रूप से विचार कर विशेष अNOC दे सकती है। Land Seling act एक्ट के मुताबिक tea garden की जमीन की वसीयत भी सरकार की NOC के बिना नहीं हो सकती है। वसीयत पाने वाले व्यक्ति के पास govt की कोई भी NOC नहीं थी। यानी, officers को धोखे में रखकर वसीयत का इंतकाल चढ़ाने की कोशिश की जा रही थी जिसे पकड़ लिया गया। 

क्या कहते हैं DC
डीसी कांगड़ा राकेश प्रजापति से मामले के बारे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऐसा मामला तहसीलदार पालमपुर के पास आया था लेकिन उसे खारिज कर दिया गया है। इसके अलावा उपायुक्त ने मामले पर और कुछ भी कहने से इनकार किया।  

यह उठ रहे सवाल 
मृत्यु से पहले व्यक्ति ने पत्नी और अपनी बहन से इतर तीसरे शख्स यानी 3rd Party के नाम अरबों रुपये की 2300 कनाल जमीन की वसीयत किस कारण की, यह बड़ा सवाल है। क्या उस दौरान वसीयत करने वाले और वसीयत पाने वाले तीसरे व्यक्ति के बीच में कोई डील तो नहीं हुई थी। क्योंकि, अरबों रुपये की जमीन आखिर कोई तीसरे व्यक्ति को donate में क्यों देगा। सूत्रों की मानें तो चाय बागान के अधीन land की वसीयत पाने वाला तीसरा व्यक्ति Mohali की एक बड़ी कंपनी से संबंधित है जो हिमाचल सहित कई राज्यों में बड़े projects के tender लेती है।

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