को-ऑपरेटिव बैंक अब RBI की निगरानी में, 8.6 करोड़ ग्राहकों को होगा ये फायदा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बुधवार को कैबिनेट बैठक हुई. इस बैठक में co-operative बैंक को लेकर एक अहम फैसला लिया गया है. इस फैसले के तहत अब देश के सभी सहकारी बैंक (अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक हो या मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक) रिजर्व बैंक की निगरानी में आएंगे. यहां बता दें कि अभी देश में 1482 अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक और 58 मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक हैं.

इनका audit RBI नियमों के तहत होगा. अगर कोई bank वित्तीय संकट में फंसता है, तो उसके board पर निगरानी भी RBI ही रखेगा. हालांकि, प्रशासनिक मसलों को रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव्स देखते रहेंगे. बहरहाल, सवाल ये है कि सरकार ने ये फैसला क्यों लिया है और इसका customer को क्या फायदा होगा.

आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं.

दरअसल, बीते कुछ समय से देश के अलग-अलग हिस्सों के co-operative bank में नियमों की अनियमितता का खुलासा हुआ है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक है. इस bank ने रिजर्व बैंक के कई नियमों का उल्लंघन तो किया ही, साथ ही central bank को गुमराह भी किया. PMC Bank के मैनेजमेंट पर आरोप है कि नियमों को ताख पर रखकर हाउिसंग डेवलपमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर (HDIL) को लोन दिया गया. बैंक ने यह कर्ज HDIL को ऐसे समय में दिया जब यह company दिवालिया होने की प्रक्रिया से गुजर रही थी.

पिछले साल यानी 2019 में इसका खुलासा हुआ. इसके बाद Reserve Bank ने पीएमसी बैंक पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी. इस पाबंदी के तहत ग्राहकों को पैसे निकालने की limit भी तय कर दी गई. वहीं, Bank को नए loan या नए निवेश के अलावा deposit पर रोक लगा दी गई. ऐसे ही एक मामले में मुंबई स्थित CKP सहकारी बैंक का licence cancel कर दिया गया.

फैसले का फायदा

PMC बैंक जैसे मामलों के आने के बाद customer की परेशानी बढ़ी है और banks पर से भरोसा कम हुआ है. GOVT का कहना है कि इन बैंकों के RBI की निगरानी में आने के बाद 8.6 करोड़ से अधिक Depositor को भरोसा मिलेगा. यह आश्वासन मिलेगा कि उनका bank में जमा 4.84 लाख करोड़ रुपया सुरक्षित है. इसके साथ ही customer के हित में reserve bank द्वारा लिए गए फैसले का फायदा private और govt banks के साथ ही co-operative तक पहुंचेगा.

बजट में हुआ था ऐलान

इसी साल February में आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने co-operative bank को RBI की निगरानी में लाने का प्रस्ताव रखा था. इसके साथ ही वित्त मंत्री ने जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (DICGC) को 1 लाख से बढ़ाकर 5 लाख कर दिया था. इसका मतलब ये हुआ कि बैंक में जमा राशि डूब भी जाती है तो आपको 5 लाख तक की बीमा मिलेगी.

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