सदाबहार अभिनेता देवानंद के जन्मदिवस पर आज सिनेमा प्रेमियों ने याद किया

26 सितंबर 1923 को जन्में देवानंद को आज देशभर में सिनेमा प्रेमी और उनके प्रशंसक याद कर रहे हैं।जब-जब देवानंद फिल्मी पर्दे पर आते, दर्शकों में एक अलग रोमांच पैदा कर देता था।उनका पहनावा, चलने का अंदाज, हेयर स्टाइल और उनके बोलने का तरीका सिनेमा प्रेमियों में अनूठा छाप छोड़ता गया । 60 के दशक में उनकी दीवानगी पूरे देश में इतनी अधिक बढ़ गई कि सरकार को उनके काले कपड़े पहनने पर बैन ही लगाना पड़ा था ।देवानंद ने हमेशा अपने आपको जवान रखा तभी सदाबहार या एवरग्रीन जैसे उनके नाम के साथ ही जुड़ गया था |

हर फिक्र को धुएं में उड़ाता चला गया… यह दिल न होता बेचारा, कदम न होते आवारा, जो खूबसूरत कोई अपना हमसफर होता… आज इन्हीं गानों के साथ बात को आगे बढ़ाएंगे। उनकी पर्सनल जिंदगी हो या फिल्मी, ताउम्र जवां रही।उनका अंदाज-अदाएं, जोश और स्टाइल हमेशा जवान ही दिखाई दीं । जी हां हम बात कर रहे हैं सदाबहार और एवरग्रीन सिनेमाई जादूगर देवानंद की । आज देव साहब का 97वां जन्मदिवस है । 

देवानंद का धर्मशाला से भी नाता रहा है। यहां से उन्होंने इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर बॉलीवुड की राह पकड़ी थी। हालांकि यहां से पढ़ाई करके वह लाहौर चले गए थे और उसके बाद उनका फिल्मों में आगमन हुआ था। लेकिन अपनी जवानी के दो वर्ष उन्होंने धर्मशाला में बिताए थे। वह मां की बीमारी के चलते उनके साथ यहां रहे थे। 26 सितंबर 1923 को अभिनेता देवानंद का जन्म हुआ था।धर्मशाला महाविद्यालय में उनकी यादों को लेकर अब कोई स्मृति तो नहीं है, लेकिन महाविद्यालय का पुराना परिसर अभी भी यादों का गवाह जरूर है। वर्ष 1926 में धर्मशाला में इंटरमीडिएट महाविद्यालय की स्थापना हुई थी। वर्ष 1938 से 39 तक देवानंद साहब ने यहां पर पढ़ाई की। वर्ष 1947 में यह महाविद्यालय स्नातक महाविद्यालय के तौर पर स्तरोन्नत हुआ, लेकिन तब तक वह अपनी पढ़ाई पूरी कर यहां से जा चुके थे।

स्मृतियों को ताजा करने के लिए वर्ष 1991 में गठित हुई ओल्ड स्टूडेंट एसोसिएशन (ओएसए) ने देवानंद साहब को महाराष्ट्र जाकर आने का न्योता भी दिया था। उन्होंने कार्यक्रम में आने का वादा भी किया था, लेकिन फिल्म रिलीज होने के कारण नहीं आ सके। हालांकि उन्होंने कॉलेज के पास चीड़ के पेड़ों, भागसूनाथ व चीलगाड़ी में उस समय बिताए गए लम्हों का जिक्र भी किया था।कॉलेज के पूर्व प्राचार्य एवं ओएसए के पूर्व अध्‍यक्ष प्रो. ललित मोहन शर्मा महाविद्यालय की ओल्ड स्टूडेंट एसोसिएशन का गठन वर्ष 1991 में हुआ था। एसोसिएशन द्वारा उन्हें कार्यक्रम में आने का न्योता दिया गया था। लेकिन किन्हीं कारणों से वह कार्यक्रम में भाग नहीं ले सके थे। नवंबर में कार्यक्रम आयोजित हुआ था। इसमें गजल गायक पंकज उधास भी शामिल हुए थेधर्मशाला कॉलेज ओल्‍ड स्‍टूडेंट एसोसिएशन के अध्‍यक्ष विजय जयकारिया ने भी इस संबंध में जानकारी दी। ओएसए के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. अशोक शर्मा, भूषण कुमार व तेज सिंह जयकारिया वर्ष 1991 में देवानंद साहब को न्योता देने महाराष्ट्र गए थे। इन सदस्यों के साथ अभिनेता देवानंद ने धर्मशाला महाविद्यालय के बिताए गए दिनों को याद किया था।

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